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Indian Bioscope Posts

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गली बॉयः अभी कुछ और ‘गैर अभिजात्य’ कहानियां कही जानी बाकी हैं…

सिनेमा के पर्दे पर निम्न मध्यवर्ग की कहानियां बहुत कम कही गई थीं। पिछले कुछ सालों में आई फिल्मों में इस दुनिया की कहानियां अपने पूरे रंग और अहसास के साथ आई हैं। ‘

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चश्मेबद्दूर का ‘चमको सीक्वेंस’, वो मासूमियत भरा प्यार

कुल जमा ये अफ़साना है कि दीप्ति फ़ारूख़ के यहां चमको साबुन का “डेमंस्ट्रेशन” देने आई हैं. वे फ़ारूख़ को बारम्बार बताती हैं कि “कपड़ों…

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तू न आए तो क्या भूल जाए तो क्या, प्यार करके भुलाना ना आया हमें

इस गाने पर बात करने चलें, उससे पहले तो यही अचरज जतला दें कि आरके बैनर की फ़िल्म और रफ़ी साहब का गाना! नहीं साहब,…

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पटाखाः इसी लाउडनेस में इसका सौंदर्यबोध है

‘पटाखा’ जैसी फिल्में ज्यादा बननी चाहिए। इसलिए नहीं कि यह बहुत कलात्मक फिल्म है या इसमें कोई महान संदेश है। सिर्फ इसलिए कि यह मौलिक…

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इसके ‘बल’ में बल कुछ ज़्यादा हुआ ठैरा तो क्या, पिक्चर तो भल ठैरी दाज्यू!

देश के पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल की पृष्ठभूमि में रचा गया विषय तथा कथासूत्र होने के बावजूद  राज्य से ताल्लुक़ रखने वाले तथा…

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‘मनमर्जियां’ अनुराग कश्यप की फिल्म नहीं

‘मनमर्जियां’ अनुराग कश्यप की फिल्म नहीं है। इस फिल्म में अनुराग कश्यप सिरे से गायब हैं। सिर्फ गाहे-बगाहे बिना किसी रचनात्मक संदर्भ के दो लड़कियां…

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वन्स अगेनः पूरे वक्त प्रेम को बुनती एक फिल्म

वो खट से फोन रखती थी……. तारा. वो फोन पर दूसरी तरफ आंखे मींचे टूँ-टूँ-टूँ सुनता था…….. अमर. तारा हर बार जब यूं फोन रखती…

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डिम्पलः ऑनर किलिंग पर नज़र डालती एक संजीदा कोशिश

देश के कुछ हिस्से, ख़ास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाक़े एक विशिष्ट लेकिन अमानवीय, बर्बर और हैवानियत भरी वजह से…

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पलटनः बॉर्डर न सही, जेपी दत्ता तो हैं

किसी भी क्षेत्र में एक बार कालजयी, बहुप्रशंसित और अत्यधिक सफल मुक़ाम का स्पर्श कर लेना कई नई चुनौतियों को जन्म देते हुए आगे की…

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मकबूल, ओमकारा, हैदर या निम्मी, डॉली, गजाला

सतह पर विशाल की शेक्सपीरियन त्रयी मकबूल, ओमकारा और हैदर की त्रासदियों का आख्यान लगती है, मानों अपने दौर के सामाजिक ढांचे, राजनीतिक षडयंत्रों, सहज…

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