डिम्पलः ऑनर किलिंग पर नज़र डालती एक संजीदा कोशिश

देश के कुछ हिस्से, ख़ास तौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के कई इलाक़े एक विशिष्ट लेकिन अमानवीय, बर्बर और हैवानियत भरी वजह से अक्सर चर्चा में रहते हैं, जिसे हम आम शब्दों में ‘ऑनर किलिंग’ के नाम से जानते हैं – ‘ऑनर किलिंग्स’ यानि इज़्ज़त बचाने के लिए की जाने वाली हत्याएँ.

चन्द्रयान पर चढ़ कर सबके साथ, सबके विकास का आसमान छू रहे इस महान देश की सबसे ज़्यादा गौरवशाली उपलब्धियों में से एक यह है कि जातियों, वर्णों, गोत्रों और बिरादरियों की ज़हरीली दीवारों में बँटे, एक-दूसरे के सर पर अपनी जूती रखने को उद्यत हिंसक नरपिशाचों के क़बीलों जैसे इसके समाज इसकी इज़्ज़त के लिए कोई ख़तरा पैदा नहीं करते. हाँ लेकिन अगर इन्हीं दीवारों को लाँघ कर कोई प्रेमी युगल अपना प्यार पाना चाहे, तो इसकी प्राचीन और वन्दनीय सभ्यता, संस्कृति की इज़्ज़त बचाने के लिए कम से कम उन दो लोगों की नृशंसतापूर्वक हत्या करना ज़रूरी हो जाता है.

एक माध्यम के तौर पर वेब वीडियो ने विविध और ग़ैर-पारंपरिक विषयों को लघु फ़िल्मों के रूप में पेश करने का एक कम ख़र्चीला साधन उपलब्ध करवाया है, जिसका उपयोग युवा तथा नवोदित फ़िल्ममेकर अलग-अलग तरह के विषयों मसलों को उठाने के लिए कर रहे हैं. उसी कड़ी में, हैदराबाद के अन्नपूर्णा फ़िल्म संस्थान में अध्ययनरत आधार सिद्धू नाम के एक प्रशिक्षु फ़िल्मकार ने अपने डिप्लोमा प्रोजेक्ट के तौर पर बनाई गई ‘डिम्पल’ नाम की शॉर्ट फ़िल्म के केन्द्र में ‘ऑनर किलिंग’ के विषय को ही रखा है.

फ़िल्म उत्तर प्रदेश के भदोही नामक क़स्बे के पुलिस थाने में घटे एक काल्पनिक घटनाक्रम पर आधारित है, जिसके दौरान इलाक़े के एक बड़े और दबंग राजनेता की बेटी किसी अन्य जाति के लड़के के साथ घर से भाग निकलती है और वे दोनों अपनी जान बचाने की गुहार लेकर इस थाने में शरण लेने आते हैं, तथा बदली हुई परिस्थितियों से दो-चार होते हैं.

किसी विवाद में पड़ने की गुंजाइश से बचने के लिए फ़िल्म में प्रेमी युगल की जातियों के उल्लेख से बचा गया है, हालांकि ऐसा करने से उसके वातावरण में व्याप्त ख़ौफ़ कम नहीं होता.

‘डिम्पल’ आधार सिद्धू की पहली लघु फ़िल्म है, और ज़ाहिर तौर पर इसकी संरचना में अनगढ़पन जगह-जगह साफ़ दिखता है, लेकिन यह बात उल्लेखनीय है कि फ़िल्म के सन्देश में व्याप्त लगातार गम्भीरता बरक़रार रहती है. उनकी भविष्य की फ़िल्मों को लेकर ‘डिम्पल’ उम्मीदें जगाती है.

फ़िल्म के कलाकारों में अधिकतर नए हैं और लगभग सभी ने अपनी भूमिकाएँ ठीक से निभाई हैं, हालांकि थाना भदोही के प्रभारी निरीक्षक की भूमिका निभा रहे विशाल सक्सेना का आत्मविश्वास और सहजता विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं. लगभग एक दशक से सक्रियतापूर्वक थिएटर करते आ रहे विशाल को रंगमंच के प्रति उनकी प्रतिबद्धता से जो अनुशासन मिला है वह उनके अभिनय और संवाद अदायगी में झलकता है, हालांकि शारीरिक भंगिमाओं और विशेषकर अभिनय के दौरान हाथों के बेहतर इस्तेमाल पर वे काम कर सकें, तो आगे बतौर अभिनेता उनसे आशाएँ रखी जा सकती हैं. ‘डिम्पल’ को यहाँ देखा जा सकता है.

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