Author: IB Team

इंडियन बाइस्कोप भारतीय सिनेमा के अनुछए पहलुओं पर बात करता है। चाहे तो बीते दौर की लीक से हटकर बनी यादगार फिल्में हों या फिर आज के दौर का इंडिपेंडेंट सिनेमा।
  • क्या कृष्ण हैं भारतीय नायक?

    जहां हर बालक इक मोहन है, और राधा इक-इक बाला… सिकन्दर-ए-आज़म (1965) में राजेन्द्र कृष्ण का लिखा गीत भारतीय नायक की आर्किटाइपल छवि क्या है? पश्चिम में यह ग्रीक मिथकों और बाइबिल की महागाथा से ओतप्रोत है. वहां मनुष्य और प्राकृतिक शक्तियों के बीच संघर्ष ज्यादा गहरा होकर उभरता है. इसके उलट भारतीय समाज लंबे समय से नायकों की पूजा… Continue reading "क्या कृष्ण हैं भारतीय नायक?"

  • ए स्टूपिड कॉमन मैन…

    एक नजर इंडिया के आम आदमी की आइकोनिक इमेज वाली पांच फिल्मों पर आक्रोश (1980) आम आदमी का गुस्सा एक कभी न खत्म होने वाली चुप्पी बन सकता है. गोविंद निहलानी की पहली फिल्म आक्रोश में ओम पुरी ने इसका एहसास कराया. विजय तेंडुलकर की लेखनी, निहलानी का डायरेक्शन और नसीर, स्मिता और ओम पुरी की शानदार एक्टिंग इसका दर्जा… Continue reading "ए स्टूपिड कॉमन मैन…"

  • मैं इस दुनिया की कहानी कहता हूं: राजकुमार गुप्ता

    उनकी फिल्म ‘आमिर’ ने पहली बार मेरा ध्यान खींचा था. अपने अलग तरह के प्रोमो के कारण. बाद में मैंने यह फिल्म देखी. जिस बात ने सबसे ज्यादा प्रभावित किया, वह था रियलिस्टिक ट्रीटमेंट और कसी हुई स्क्रिप्ट. इससे भी बढ़कर यह कि इसे देखकर इससे मिलती-जुलती किसी और फिल्म की याद नहीं आती थी. राजकुमार गुप्ता की फिल्म ‘नो… Continue reading "मैं इस दुनिया की कहानी कहता हूं: राजकुमार गुप्ता"

  • प्रलय की कहानियां

    सिनेमा में तबाही की अवधारणा बाकायदा फिल्म मेकिंग की एक धारा के रूप में डेवलप हो चुकी है, जिनमें दुनिया के अंत या बुरे भविष्य की आशंकाओं के आसपास कहानी बुनी जाती है. चाहे भारत में जबरदस्त सफल रही हॉलीवुड की ‘2012’ हो, या हाल में आई ‘स्काईलाइन’ या कुछ बरस पहले धूमकेतु के धरती से टकराने का अंदेशा लेकर… Continue reading "प्रलय की कहानियां"

  • पूरब और पश्चिम

    हाल में क्रुक देखते हुए यह ख्याल आया कि हमारी फिल्मों में विदेशी चरित्रों को पेश करने का तरीका कितना सतही है. क्रुक आस्ट्रेलिया में नस्लवाद की समस्या की तह तक जाने का दावा करती है, मगर वहां के चरित्रों को ही विश्वसनीय तरीके से नहीं पेश कर पाती. फिल्म की एक अहम किरदार, आस्ट्रेलियन युवती निकोल का चरित्र भी… Continue reading "पूरब और पश्चिम"

  • …उन बदनाम चेहरों की दास्तान

    हाजी मस्तान (1926-1994) साठ और सत्तर के दशक में मुंबई में एक स्मगलर और गैंगस्टर बनकर उभरे हाजी मस्तान ने भी सिनेमा इंडस्ट्री को इंस्पायर किया है. हाजी मस्तान के जीवन पर पहली फिल्म बनी दीवार और सुपरहिट हुई. अमिताभ के कॅरियर के लिए यह मील का पत्थर साबित हुई. अमिताभ की एक और सुपरहिट फिल्म मुकद्दर का सिकंदर भी… Continue reading "…उन बदनाम चेहरों की दास्तान"

  • गांधी को समझना हो तो पॉपुलर कल्चर की तरफ जाएं

    आज के संदर्भ में अगर गांधी को समझना हो तो पॉपुलर कल्चर की तरफ जाएं. चाहे वो सिनेमा हो, म्यूजिक हो या महज फैशन. बात सुनने में अटपटी लग सकती है- मगर जीवन के लिए उतनी ही सहज है. अगर आप गौर करें तो पाएंगे कि हाल के दिनों में गांधी की सबसे बेहतरीन व्याख्या किन्ही भारी-भरकम आलोचनात्मक किताबों में… Continue reading "गांधी को समझना हो तो पॉपुलर कल्चर की तरफ जाएं"

  • मेड इन इंडिया…

    कहीं से एक लहर उठी और सारी दुनिया झूमने लगी. बीते दो दशकों में सबसे बड़ा कल्चरल चेंज इंडियन पॉपुलर म्यूजिक में देखने को मिलता है. इंडिया ने वेस्टर्न म्यूजिक को एक खास स्टाइल दिया और ग्लोबल आइडेंटिटी बनाई है. बदलाव के बीच बहुत से नाम उभरे, चमके और ग़ायब हो गए. वक्त की लहरें गीली रेत पर कदमों के… Continue reading "मेड इन इंडिया…"

  • पीपली लाइवः एक यथार्थ जो ‘हिट’ है

      In the room the women come and go Talking of Michelangelo. From The Love Song of J. Alfred Prufrock by TS Eliot देखते-देखते ‘पीपली लाइव’ सफल फिल्मों की कतार में खड़ी हो गई। दस करोड़ की लागत- जिसमें फिल्म के प्रमोशन का खर्च भी शामिल है- वाली ‘पीपली लाइव’ ने अपनी कीमत सेटेलाइट और म्यूजिक राइट्स के चलते वसूल… Continue reading "पीपली लाइवः एक यथार्थ जो ‘हिट’ है"

  • जोगिंदर की स्मृति में

    ‘रंगा खुश’ जोगिंदर इस दुनिया में नहीं रहा। यह खबर मुझे देर से मिली और जब आज शाम को एक मित्र से बातों-बातों में पता लगा तो इस पर पोस्ट लिखने से खुद को रोक नहीं सका। जोगिंदर का नाम खराब एक्टिंग और खराब फिल्में प्रोड्यूस करने का पर्याय बन चुका था। वैसे भी उनको भारत के दस सबसे खराब… Continue reading "जोगिंदर की स्मृति में"