Category: Comics/Pulp

  • ग्राफिक नॉवेलः नए ज़माने की नई किताबें

    नोएडा में गेमिंग स्टूडियो चलाने वाले फैजल ने खुद को टेंशन फ्री रखने के लिए एक कैरेक्टर रचा गुड्डू- जो उनके अपने बचपन की तस्वीर थी। फैजल कार्टून बनाते और फेसबुक पर दोस्तों के बीच शेयर करते। यह इतना लोकप्रिय हुआ कि फैजल ने इसका एक फेसबुक पेज बनाया ‘गारबेज बिन’। पहले महीने दो लाइक्स हुए। इसके बाद जो हुआ… Continue reading "ग्राफिक नॉवेलः नए ज़माने की नई किताबें"

  • एक नायक के साथ 75 साल

    यह महज एक संयोग रहा होगा कि जिस महीने सुपरमैन को 75 साल पूरे हुए उसी दौरान एक अमेरिकी बिल्डिंग कान्ट्रैक्टर डेविड को मिनेसोटा में एक घर की दीवार के पीछे बरसों से अंधेरे में दबी सुपरमैन पहली कामिक हाथ लग गई। जून 1938 में छपी ने इस सुपरमैन की इस पहली कॉमिक बुक की पिछले दिनों नीलामी हुई तो… Continue reading "एक नायक के साथ 75 साल"

  • बदलती दुनिया में महानायक

    I’m not questioning your powers of observation; I’m merely remarking upon the paradox of asking a masked man who he is. फिल्म ‘वी फॉर वेंडेटा’ से जेम्स बांड की फिल्म ‘स्काईफाल’ में एक दिलचस्प दृश्य है। बांड पहली बार अपने नए क्वार्टरमास्टर यानी क्यू से मिलता है। रिसर्च और डेवलपमेंट डिवीजन का पिछला हेड बुजुर्ग होकर रिटायर हो चुका है।… Continue reading "बदलती दुनिया में महानायक"

  • बंबई रात की बाहों में

    राजकपूर के लिए सदाबहार हिट फिल्में देने वाले ख्वाजा अहमद अब्बास ने खुद के निर्देशन में भी बहुत सी फिल्में बनाई हैं और आम तौर पर उनकी फिल्में तत्कालीन आलोचकों द्वारा खारिज कर दी जाती थीं। यह माना जाता था कि जब अब्बास खुद के निर्देशक में फिल्म बनाते थे तो वे संतुलित नहीं रह पाते थे और उनकी फिल्म… Continue reading "बंबई रात की बाहों में"

  • अनजान टापू पर नफरत और प्रेम

    किताबों और फिल्मों का गहरा रिश्ता है। गौर करें तो भारतीय समांतर सिनेमा या जिसे हम कला सिनेमा कहते हैं उसकी बुनियाद में ही आधुनिक हिन्दी साहित्य है। इस पर मैं कभी अलग से लिखना चाहूंगा। इसे छोड़ भी दें तो दुनिया भर में स्तरीय सिनेमा का निर्माण किताबों को आधार बनाकर हुआ है। गॉन विथ द विंड, बेनहर, ए… Continue reading "अनजान टापू पर नफरत और प्रेम"

  • डॉयलॉग, डॉयलॉग और डॉयलॉग..

    “माँ, मै फर्स्ट क्लास फर्स्ट पास हो गया हूँ” “माँ तुम कितनी अच्छी हो” “भैया!” “आज पिंकी का जन्म-दिन है””मैने इस ज़मीन को अपने खून से सींचा है… ” “वो एक गन्दी नाली का कीडा है” “कुत्ते! कमीने! …..” “इसे धक्के मारके बाहर निकाल दो ” “ज़बान को लगाम दो ..” “तुने मेरे पीठ पे छुरा भोंका है””मै कहती हूँ,… Continue reading "डॉयलॉग, डॉयलॉग और डॉयलॉग.."

  • हॉरर फिल्में: भीतर छिपे भय की खोज

    कभी लगातार प्रयोगों से बॉलीवुड सिनेमा को एक नया रास्ता दिखाने वाले राम गोपाल वर्मा ने शायद अब अपने लिए दो सुरक्षित जोन तलाश लिए हैं, अंडरवर्ल्ड और हॉरर। लंबे समय से इन्हीं दो विषयों को बदल-बदल कर प्रस्तुत करने वाले रामू इस बार फूंक लेकर आए हैं। वैसे यह बाकी हॉरर फिल्मों से अलग सी दिखती है। यह रामू… Continue reading "हॉरर फिल्में: भीतर छिपे भय की खोज"

  • कॉमिक्स और सिनेमाः फ्रेम-दर-फ्रेम

    बीते दिनों चैनल जूम पर डायरेक्टर्स कट में शेखर कपूर का इंटरव्यू देखा. इंटरव्यू लेने वाले कबीर बेदी थे. जितने उत्साह से मैं देखने बैठा था, उस लिहाज से निराशा हुई. बहुत सतही से सवाल पूछे गए. जहां कहीं भी शेखर किसी मुद्दे पर खुलने को होते, सवालों का रुख बदल जाता. बहरहाल शेखर ने इस बीच दो दिलचस्प बातें… Continue reading "कॉमिक्स और सिनेमाः फ्रेम-दर-फ्रेम"

  • किस्सा-ए-हॉलीवुडः गतांक से आगे

    एंपायर स्ट्राइक्स बैक जैसे साइंस फिक्शन और फ्लैश गार्डेन और स्पाइडर मैन स्ट्राइक्स बैक जैसी कॉमिक चरित्रों पर आधारित फिल्मों के बाद उम्र का वह दौर आया जब हम- यानी मैं और मेरे साथी वयस्कों की दुनिया में कदम रख रहे थे. हमारी उम्र थी करीब 16-17 बरस… उस दौर में ब्लैक एंड ह्वाइट टीवी पर पुरानी फिल्में देखने, जून… Continue reading "किस्सा-ए-हॉलीवुडः गतांक से आगे"