Category: Retro

  • डॉयलॉग, डॉयलॉग और डॉयलॉग..

    “माँ, मै फर्स्ट क्लास फर्स्ट पास हो गया हूँ” “माँ तुम कितनी अच्छी हो” “भैया!” “आज पिंकी का जन्म-दिन है””मैने इस ज़मीन को अपने खून से सींचा है… ” “वो एक गन्दी नाली का कीडा है” “कुत्ते! कमीने! …..” “इसे धक्के मारके बाहर निकाल दो ” “ज़बान को लगाम दो ..” “तुने मेरे पीठ पे छुरा भोंका है””मै कहती हूँ,… Continue reading "डॉयलॉग, डॉयलॉग और डॉयलॉग.."

  • हॉरर फिल्में: भीतर छिपे भय की खोज

    कभी लगातार प्रयोगों से बॉलीवुड सिनेमा को एक नया रास्ता दिखाने वाले राम गोपाल वर्मा ने शायद अब अपने लिए दो सुरक्षित जोन तलाश लिए हैं, अंडरवर्ल्ड और हॉरर। लंबे समय से इन्हीं दो विषयों को बदल-बदल कर प्रस्तुत करने वाले रामू इस बार फूंक लेकर आए हैं। वैसे यह बाकी हॉरर फिल्मों से अलग सी दिखती है। यह रामू… Continue reading "हॉरर फिल्में: भीतर छिपे भय की खोज"

  • छोटी सी बात मुहब्बत की…

    घर लौटते वक्त, कभी कोई काम करते समय या अनायास सड़क से गुजरते हुए… न जाने कितने सालों से यह गीत मैं गुनगुना उठता हूं. बहुत सादा से शब्दों वाले इस प्रेम गीत का न जाने क्या जादू है.. जो कभी खत्म नहीं होता. लगता है कि किसी के दिल से कोई बहुत सीधी-सच्ची सी बात निकली है और अपने… Continue reading "छोटी सी बात मुहब्बत की…"

  • लो दिल की सुनो दुनिया वालों…

    सिनेमा की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह अपने आसपास भी एक खूबसूरत सा रचनात्मक संसार रचता हुआ चलता है. मेरे बचपन में ग्रामोफोन के रिकार्ड्स बिक्री और लोकप्रियता के मामले अपने चरम पर पहुंचकर आहिस्ता-आहिस्ता विलुप्त हो गए. मगर अवचेतन में उनके खूबसूरत कलात्मक कवर और उनसे उठता संगीत कहीं गहरे तक धंस गया है. तकनीकी रूप से… Continue reading "लो दिल की सुनो दुनिया वालों…"

  • किस्सा-ए-हॉलीवुडः गतांक से आगे

    एंपायर स्ट्राइक्स बैक जैसे साइंस फिक्शन और फ्लैश गार्डेन और स्पाइडर मैन स्ट्राइक्स बैक जैसी कॉमिक चरित्रों पर आधारित फिल्मों के बाद उम्र का वह दौर आया जब हम- यानी मैं और मेरे साथी वयस्कों की दुनिया में कदम रख रहे थे. हमारी उम्र थी करीब 16-17 बरस… उस दौर में ब्लैक एंड ह्वाइट टीवी पर पुरानी फिल्में देखने, जून… Continue reading "किस्सा-ए-हॉलीवुडः गतांक से आगे"

  • अतीत के कुछ और चलचित्र या किस्सा-ए-हॉलीवुड

    अभी सलीमा की एक ताजा प्रविष्ठि में हमारे वरिष्ठ फिल्म समीक्षक प्रमोद सिंह ने अतीत के प्रति मुग्ध होकर देखने के खतरों के प्रति चेताया भी मगर उसके बावजूद मैं उन पुरानी फिल्मों के जादू से छुटकारा नहीं पा सका हूं. मुझे पता है कि आज मेरी संवेदना का स्तर दोबारा देखे जाने पर उन फिल्मों को काफी बचकाना मानेगा.… Continue reading "अतीत के कुछ और चलचित्र या किस्सा-ए-हॉलीवुड"

  • अतीत के चलचित्र

    कभी निर्मल वर्मा ने यह उपन्यास के सिलसिले में कहा था कि एक अच्छे उपन्यास की पहचान यह होती है कि उन शब्दों में बसा जीवन हमारे खुद के जीवन में उतर आता है. क्या यह सिनेमा का भी सच नहीं है? सिनेमा उतना ही मेरी यादों में बसा है, जितनी कि मेरे वास्तविक जीवन की छवियां… प्रोजेक्टर के पीछे… Continue reading "अतीत के चलचित्र"

  • कल तुमसे ज़ुदा हो जाउंगा

    Get this widget | Share | Track details अपने प्रगतिशील साथियों की तमाम लताड़ सुनने के बावजूद कहीं मेरे भीतर लाइफ की एब्सर्डिटी को लेकर गहरा असंतोष है, जो जब-तब गहरा हो जाता है. यह अवसाद मेरी निजी परेशानियों या तकलीफों से नहीं उपजता… यह कभी भी अपने आसपास को देखते हुए भीतर जाग उठता है. ऐसे में बहुत कम… Continue reading "कल तुमसे ज़ुदा हो जाउंगा"

  • हम तुम कुछ और बंधेंगे

    Powered by eSnips.com जब कभी सिनेमा के बारे में कुछ लिखना चाहता हूं तो दिल यही चाहता है कुछ उन बहुत मामूली सी बातों के बारे में लिखूं जिनका मेरे जीवन में बहुत महत्व रहा है. फिर यह भी ख्याल आता है कि इन बातों में भला किसी की क्या दिलचस्पी हो सकती है, बेहतर हो अगर मैं सिनेमा से… Continue reading "हम तुम कुछ और बंधेंगे"

  • कुछ कमाल अमरोही के बारे में

    Powered by eSnips.com कमाल अमरोही और वीएस नायपाल अलग-अलग विधाओं के दो ऐसे जीनियस हैं, जिनकी निजी जिंदगी, जिनके विचार भले विवादित हों मगर उनकी असाधारण प्रतिभा में संदेह नहीं किया जा सकता. शायद अपने जीवन से जुड़े विवादों या विचारों के चलते वे अपनी बेहतर परंपरा भी नहीं विकसित कर सकें. कमाल अमरोही के बारे में तो यह साफ-साफ… Continue reading "कुछ कमाल अमरोही के बारे में"