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कल तुमसे ज़ुदा हो जाउंगा

अपने प्रगतिशील साथियों की तमाम लताड़ सुनने के बावजूद कहीं मेरे भीतर लाइफ की एब्सर्डिटी को लेकर गहरा असंतोष है, जो जब-तब गहरा हो जाता है. यह अवसाद मेरी निजी परेशानियों या तकलीफों से नहीं उपजता… यह कभी भी अपने आसपास को देखते हुए भीतर जाग उठता है. ऐसे में बहुत कम चीजें होती हैं जो मुझे संतोष दे पाती हैं. कई बार मन में यह सवाल कौंधता है कि भीतर और बाहर की अराकता को एक सिस्टम दे सकूं, एक दिशा दे सकूं- वह कौन सा रास्ता है. मन ही मन बुद्ध से लेकर चे ग्वेरा तक को खंगाल डालता हूं.

जिंदगी में बहुत से सवाल तो अनसुलझे ही रह जाएंगे मगर यहां पर मेरी इस पूरी भूमिका के पीछे दरअसल मेरा एक और मनपसंद गीत है. कभी-कभी का यह गीत मुझे भीतर से सुकून देता है. ऐसा लगता है कि वह मेरे भीतर मौजूद तूफान को एक शांत बहती नदी में बदल रहा है. मैं पल दो पल का शायर हूं… यह दरअसल दो गीतों की श्रृंखला है जो एक साथ मिलकर ही कंप्लीट होती है. इसका दूसरा हिस्सा है मैं हर इक पल का शायर हूं… हिन्दी में बहुत कम गीतों की श्रृंखला है जो इस तरह साथ मिलकर अपना अर्थ प्रकट करती हो.

लिखा साहिर ने, संगीत खय्याम ने दिया और गाया मुकेश ने…. और इस तरह से यह हिन्दी सिनेमा का न भुलाने वाला गीत बन गया. पहला गीत जीवन के नश्वर होने की बात कहता है मगर इसकी खूबी यह है कि यह आपके भीतर बेचारगी का भाव नहीं पैदा करता. यह दरअसल जीवन के प्रति एक ईमानदार स्वीकारोक्ति है. यह आपको अहंकार से मुक्त होने के लिए नहीं कहता, आपको खुद-ब-खुद अहंकार से मुक्त कर देता है. इसके बोल देखें-

मैं पल दो पल का शायर हूं, पल दो पल मेरी कहानी है
पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी है

अगली पंक्तियों में साहिर दरअसल वही कह रहे हैं, जिसके बारे में कभी टीएल इलियट ने अपने लेख ट्रेडीशनल एंड इंडीविजुअल टैलेट मे लिखा था. यानी कोई भी इंसान, कोई भी प्रतिभा, कोई भी कलाकार अपनी परंपरा को पहचानकर जगह बनाता है, भले वह परंपरा को स्वीकारे या नकारे या उसमें संशोधन करे. देखें-

मुझसे पहले कितने शायर आए और आकर चले गए
कुछ आहें भरकर लौट गए कुछ नग़मे गाकर चले गए
वो भी इक पल का किस्सा थे, मैं भी इक पल का किस्सा हूं
कल तुमसे ज़ुदा हो जाउंगा, वो आज तुम्हारा हिस्सा हूं

आगे की लाइनें आपके भीतर के अहंकार को खत्म करके कल का भरोसा दिलाती हैं. कल आपका नहीं होगा. वह आपके बनाए वर्तमान से बेहतर होगा. दुनिया तो चलती ही रहेगी.. आप रहें या न रहें. देखें-

कल और आएंगे नग़मों की खिलती कलियां चुनने वाले
मुझसे बेहतर कहने वाले वाले, तुमसे बेहतर सुनने वाले
कल कोई मुझको याद करे, क्यूं कोई मुझको याद करे
मसरूफ़ ज़माना मेरे लिए क्यों वक्त अपना बरबाद करे

आगे फिल्म में यह गीत दोबारा आता है मगर उसकी पंक्तियां जीवन की नश्वरता को सच मानते हुए उसके शाश्वत होने की बात कहती हैं. बिना पहले गीत को सुने उसकी पूरी खूबसूरती को आप महसूस नहीं कर सके…

मैं हर इक पल का शायर हूं, हर इक पल मेरी कहानी है
हर इक पल मेरी हस्ती है, हर इक पल मेरी जवानी है

पहले गीत का भाव तो मैं आप तक पहुंचा चुका हूं, उसे आपने कई बार सुना भी होगा, यह दूसरा गीत सुनिए और सोचिए….

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7 Comments

  1. सच फरमाया है -यह गीत बहुत सुकुन देता है जब भी कभी कुछ परेशान हो उठो. आभार इस प्रस्तुति के लिय भी.

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