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मुबारक, आपको भुला दिया हमने

कभी तनहाइयों में हमारी याद आएगी, अंधेरे छा रहे होंगे कि बिजली कौंध जाएगी… यह गीत आज भी कभी रेडियो में बजता हुआ सुनाई देता है तो एक गहरी उदासी और किसी के बिछोह की याद से आपका मन भर देता है. किंवदंति है कि जिन दिनों यह गीत पापुलर हुआ था, उसे सुनकर कई हताश प्रेमियों ने सुसाइड कर लिया.

बहरहाल यह आवाज थी मुबारक बेगम की. उनका एक गीत और कभी-कभी सुनाई देता है, मुझको अपने गले लगा-ले, अए मेरे हमराही, तुमको क्या बतलाऊं मैं कि तुमसे कितना प्यार है… मुबारक बेगम की आवाज में एक किस्म का कच्चापन था, शायद इसी कच्चेपन की वजह से लगता था कि वे पूरे दिल और अपनी पूरी भावनाओं के साथ गा रही हैं.

अब संगीत प्रेमी भी मुबारक बेगम को भूल चुके हैं. नहीं, वे जीवित हैं… मगर मुंबई में एक गुमनाम सी शख्सियत बनकर अपनी जिंदगी के अंतिम दिन गुजार रही हैं. बदलते वक्त की रफ्तार के साथ वे कहीं बहुत पीछे छूट गईं.

बीते साल मेरे एक मित्र ने मुंबई जाकर उनका इंटरव्यू किया था, मैं कोशिश करूंगा कि उस इंटरव्यू के कुछ हिस्से इंडियन बाइस्कोप के साथियों को पढ़ा सकूं. खास बात यह है कि वे आर्थिक संकट से भी जूझ रही हैं, उन्होंने हमारे साथी उम्मीद जताई थी कि शायद वह इंटरव्यू प्रकाशित होने के बाद कुछ लोग उनकी मदद के लिए आगे आएं.

मुबारक ने गाया जरूर था, कभी तनहाइयों में हमारी याद आएगी… मगर अपनी तनहाई में अक्सर उनके गीत गुनगुनाने वाली एक पूरी पीढ़ी उनको और भारतीय सिने संगीत के इतिहास में उनके योगदान को भूल चुकी है…

सिर्फ हवाओं में एक लरजती-खनकती आवाज जैसे रह-रह कर शिकवा करती है…

हमारी याद आएगी…

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2 Comments

  1. दिनेश भाई ..नमस्कार ..पहली बार आया हूं इंडियन बाइस्कोप पर…बीती रात दो बजे तक रफ़ी साहब की याद में मंसूब एक शो की एंकरिंग की ख़ुमारी थी ..और मज़ा देखिये उस शो में रफ़ी साहब के जिस युगल गीत को सबसे ज़्यादा पसंद किया गया वह था मुबारक आपा का गाया हुआ ..हमको अपने गले लगा लो ऐ मेरे हमराही..वाक़ई वे एक मुबारक और पाक़ आवाज़ हैं . यहाँ आकाशवाणी इन्दौर के लाइव कंसर्ट में कई बार आईं हैं वे.हमारे ग्रामोफ़ोन रेकाँर्ड संकलनकर्ता सुमन चौरसिया मुबारक आपा से मुंबई में मिलते रहते हैं और एक बार मुझसे मुबारक आपा की बात भी करवा चुके हैं..वे हमारे चित्रपट संगीत की ’अनसंग क्वीन ’ हैं मै एक ऐसी फ़ेहरिस्त बनाने में मसरूफ़ हूं जिसमें वक़्त की बेरहमी के शिकार फ़नकारों के नाम हैं जैसे संगीतकार रामलाल,गायक जसपालसिंह (गीत गाता चल) छाया गांगुली गुणी शामिल हैं और बेशक ! मुबारक आपा . इस अज़ीम गुलूकारा को याद करने के लिये साधुवाद !

  2. आपकी प्रतिक्रिया जानकर बहुत अच्छा लगा. अगर हम इन कलाकारों और उनके टैलेंट को याद कर सकतें हैं तो अपनी सीमाओं के भीतर ही सही उनके लिए कुछ करना भी चाहिए… आगे भी अपनी राय देतें रहें.
    दिनेश

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