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हम तुम कुछ और बंधेंगे

जब कभी सिनेमा के बारे में कुछ लिखना चाहता हूं तो दिल यही चाहता है कुछ उन बहुत मामूली सी बातों के बारे में लिखूं जिनका मेरे जीवन में बहुत महत्व रहा है. फिर यह भी ख्याल आता है कि इन बातों में भला किसी की क्या दिलचस्पी हो सकती है, बेहतर हो अगर मैं सिनेमा से जुड़े कुछ गंभीर किस्म के मुद्दों पर चर्चा करूं, कम से कम मेरी विद्वता की धाक तो जमेगी, कुछ नहीं तो हाल में देखी गई ईरानी फिल्मों के बारे में ही लिख डालूं.

सच बताऊं? तो दिल नहीं चाहता. बहुत विद्वता से भी जी घबराने लगा है. इन दिनों दिल संगीत में डूब-उतरा रहा है… तो इस बार मैं एक गीत के बारे में लिखना चाहता हूं…. यह बहुत सुंदर गीत है, कम सुनने में आता है मगर रेडियो पर कभी-कभी बज उठता है. इस गीत का मेरे जीवन से गहरा रिश्ता है. फिल्म थी तेरे मेरे सपने… जो मैंने बचपन में अपने भाई और उनके बहुत क्लोज फ्रैंड के साथ देखी थी. फिल्म तो भूल गई मगर वह गीत और उसके दृश्य बाद तक मेरे मन में अंकित रहे.. बीते साल मैंने उसकी वीसीडी खरीदकर वह फिल्म दोबारा देखी तो उसके पीछे भी कहीं न कहीं वह गीत था. शायद मैं उन गीतों के बारे में लिखना चाहता हूं जिन्होंने मुझे उतना ही नैतिक बल दिया जितना कि टालस्टाय या गोर्की के उपन्यासों ने… उनमें से एक गीत यह भी था.

इसे लिखा था नीरज ने. खास बात यह है कि यह गीत परंपरागत रोमांटिक गीतों से अलग जीवन साथ जीने भाव को लेकर आगे बढ़ता है. यह साझा खुशियों की बात करता है. यह रिश्तों के भीतर बहती समय की नदी तक आपको ले जाता है. वास्तव में यह सिर्फ एक आने वाले मेहमान को लेकर जगमगाती उम्मीदों को व्यक्त करता है.. देखें कितनी खूबसूरती से-

वो मेरा होगा, वो सपना तेरा होगा
मिलजुल के मांगा, वो तेरा-मेरा होगा
जब-जब वो मुस्कुराएगा अपना सवेरा होगा
थोड़ा हमारा, थोड़ा तुम्हारा,
आएगा फिर से बचपन हमारा

आगे की कुछ लाइनें देखें-
हम और बंधेंगे, हम तुम कुछ और बंधेंगे
आएगा कोई बीच तो हम तुम और बंधेंगे
थोड़ा हमारा, थोड़ा तुम्हारा,
आएगा फिर से बचपन हमारा

इतनी साधी लाइनें, वह भी रिपीट करती हुई… मगर जब गीत सुनते हैं तो लगता है कि हर रिपीट से एक नया मतलब खुल रहा है.

सच बताऊं तो निजी तौर पर मैंने अपने दस सालों के दांपत्य में तमाम झंझावातों को जिस तरह झेला, कहीं उसके पीछे वह स्थायी भाव था जो इस गीत ने मेरे मन में बैठा दिया था, साहचर्य और करुणा के साथ मिलबांट कर जीवन जीने का…

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2 Comments

  1. आप तो आम और मामूली बातें ही लिखें ताकि हम भी अपने को जोड़ पायें उससे.

    वरना तो बहुत गंभीर बातों में यूँ भी उलझे जिन्दगी बीती जा रही है.

    हल्का फुल्का मन का ही चलाईये बाईस्कोप, शुभकामनायें.

  2. आपके चिट्ठे पर आया एवं आपकी रचनाओं का अस्वादन किया. आप अच्छा लिखते हैं, लेकिन आपकी पोस्टिंग में बहुत समय का अंतराल है. सफल ब्लागिंग के लिये यह जरूरी है कि आप हफ्ते में कम से कम 3 पोस्टिंग करें. अधिकतर सफल चिट्ठाकार हफ्ते में 5 से अधिक पोस्ट करते हैं — शास्त्री जे सी फिलिप

    मेरा स्वप्न: सन 2010 तक 50,000 हिन्दी चिट्ठाकार एवं,
    2020 में 50 लाख, एवं 2025 मे एक करोड हिन्दी चिट्ठाकार!!

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